इस बॉलर से डरे वॉन, बोले- मेरी पैंट खराब कर सकता है ये

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बल्लेबाजों को आतंकित करने वाले पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद अब्बास का लोहा अब पूरी दुनिया मान रही है. अबु धाबी टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करियर बेस्ट प्रदर्शन करने वाले अब्बास 10 सिर्फ टेस्ट मैचों की 18 पारियों में ही 54 विकेट झटक चुके हैं.
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने इस गेंदबाज को लेकर कहा कि, 'मोहम्मद अब्बास को एक साल से ज्यादा समय से देखा है. मुझे लगता है कि वह मुझे अपनी 6 गेंदों पर हर बार आउट कर देगा. सोचा सबको बता दूंगा कि इस प्रकार का गेंदबाज मेरी पैंट तक खराब कर सकता है.'
आपको बता दें कि यह तेज गेंदबाज हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट की बड़ी खोज रहा है. अब्बास कभी लेदर फैक्ट्री में काम किया करते थे. इसके अलावा वह वेल्डिंग का काम करते थे.
अब्बास का पाकिस्तानी क्रिकेट टीम तक का सफर इतना आसान नहीं रहा. एक दशक पहले तक वह पाकिस्तान में रीयल एस्टेट से जुड़े वकीलों की मदद किया करते थे. क्रिकेट उनका सपना तो था लेकिन जीवनयापन का जरिया नहीं.
सियालकोट के रहने वाले अब्बास ने 2009 में अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की. मोहम्मद अब्बास ने अप्रैल 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी. 2018 मई में लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच में उन्होंने मैच में 8 विकेट लेकर अपनी टीम को 9 विकेट से जीत दिलाने में अहम किरदार निभाया.
कुछ लोग अब्बास की रफ्तार और सटीक गेंदबाजी की तुलना पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ से करते हैं. इस गेंदबाज का गेंदबाजी औसत सिर्फ 15.94 का है. अब्बास ने टेस्ट 10 मैचों में 50 से ज्यादा विकेट लेकर वकार यूनिस की बराबरी कर ली.
राजधानी दिल्ली के 5 स्टार होटल हयात में पिस्टल लहराने वाले आशीष पांडे ने गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर कर दिया. ये वीडियो वायरल होने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी. गुरुवार को आशीष पांडे ने वीडियो जारी कर अपने सरेंडर करने की जानकारी दी और कहा कि अभी लोगों के सामने आधी सच्चाई ही सामने आई है.  आशीष पांडे बसपा के पूर्व सांसद राकेश पांडे का बेटा है. मंगलवार को उसका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह गुलाबी पैंट पहने हुए बंदूक लहरा रहा था और एक कपल को धमका रहा था.
मोदी सरकार पर घर के अंदर से ही चौतरफा दबाव बनता जा रहा है कि वो राम मंदिर के निर्माण के लिए सदन में क़ानून लाए और अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे.

इस संभावना पर अंतिम मोहर लगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयदशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत के बयान से. संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर के लिए कानून बनाना चाहिए. अगर भागवत यह बात कह रहे हैं तो वो एक तरह से सीधे सरकार को इशारा कर रहे हैं कि संघ और भाजपा के समर्थकों और राम के प्रति आस्था रखने वालों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को सदन में राम मंदिर के लिए क़ानून लाना चाहिए.

मोदी सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए दबाव कम नहीं है. ज़मीन पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को जवाब देने से लेकर खुद को मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध दिखाना भाजपा के लिए ज़रूरी होता जा रहा है.

दूसरी ओर संतों ने सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण में देरी वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. संतों का कहना है कि क्या भाजपा मंदिर निर्माण का अपना वादा भूल गई है और क्यों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार का बयान पार्टी की ओर से बार-बार दिया जा रहा है.

ध्यान रहे कि संतों के एक बड़े वर्ग और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महंतों ने इस वर्ष 6 दिसंबर से अयोध्या में मंदिर निर्माण की घोषणा कर दी है. संत समाज का कहना है कि वो मंदिर निर्माण का काम शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोके.

संतों का यह आह्वान सरकार के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं है. केंद्र की मोदी सरकार और राज्य में योगी सरकार के लिए यह बहुत मुश्किल होगा कि संतों को रोकने के लिए वे किसी भी प्रकार का बल प्रयोग करें. इससे भाजपा को अपने समर्थकों के बीच खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

संत समाज की इस घोषणा को संघ प्रमुख के आज के भाषण से एक तरह की वैधता मिल गई है. संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वो राम मंदिर के लिए कोर्ट के फैसले का इंतज़ार नहीं करना चाहता और सरकार इसके लिए क़ानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे.

भाजपा लाएगी विधेयक?

ऐसी स्थिति में भाजपा के पास अब एक ही रास्ता बचता नज़र आ रहा है और वो यह है कि राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्थापित करने के लिए मोदी सरकार सदन के आगामी शीतकालीन सत्र में राम मंदिर के विधेयक को रखे.

इससे भाजपा को लाभ भी है. पहला तो यह कि सरकार लोगों के बीच चुनाव से ठीक पहले यह स्थापित करने में सफल होगी कि उनकी मंशा राम मंदिर के प्रति क्या है. वो अपने मतदाताओं को बता सकेगी कि कम से कम भाजपा और मोदी अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध हैं.

दूसरा लाभ यह है कि विपक्ष के लिए यह एक सहज स्थिति नहीं होगी. विपक्ष इसपर टूटेगा. कांग्रेस के लिए यह आसान नहीं होगा कि वो राम मंदिर पर प्रस्ताव का विरोध करके अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व की पूरी कोशिशों को मिट्टी में मिला दे. इससे विपक्ष में बिखराव भी होगा और सपा बसपा जैसी पार्टियों के वोटबैंक में भी सेंध लगेगी.

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